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17/04/2009

मतदान अभियान







3 टिप्‍पणियां:

manu ने कहा…

क्या कहू,,,,?
निशब्द,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!1

Rakesh ने कहा…

Mai aapakee baat se bilkul sahamt nahee.

kyaa 100% matdaan se Corruption khatm ho jaayegaa? kyaa jo karoDo kharch kar sansad yaa vidhaasabhaa me jaate hai ve khaamosh baiThkar ghar baar phook jan sevaa karane jaate hai? kyaa hai unakee kamaaee kaa saadhan? kaise un paiso ko ve vasulenge? bataaeeye?

Mai to kahataa huu 0% matdaan hee isakaa ek maatra vikalp hai, kahane ko yah buraa jaruur lagataa ho par yah kaTu saty hai.koee matdaan nahee karegaa ek din sabake hosh thikaane aa jaayenge aur phir vyavasthaa me aamul chul parivartan kee kraanti kaa sutrapaat hogaa, jo shyaad ek saaf sutharee vyavasthaa ko janm degee.

सीमा सचदेव ने कहा…

राकेश जी आज के सिस्टम के प्रति आपके मन में जो आक्रोश है , उसे मै समझ सकती हूं । यह आक्रोश केवल आपका नहीं । एक साहित्यकार की वाणी जन-जन की वाणी होती है और आपकी इस क्टुता में भी भारत के अनेकों लोगों की आवाज छुपी है लेकिन फ़िर भी हम लोग इतने स्वार्थी नहीं हो सकते , कम से कम पढे-लिखे समाज को तो ऐसी सोच नहीं रखनी चाहिए , क्या देश के नेताओं ने अपना फ़र्ज़ नहीं निभाया तो क्या हम अपने फ़र्ज़ भूल जाएंगे या फ़िर जो हमें अधिकार मिला है उसका प्रयोग नहीं करेन्गे । हमारा देश लोकतंतर की सबसे बडी मिसाल है और भारतीय होने के नाते हमें इस पर गर्व होना चाहिए । मैने पहले कहा कि एक साहित्यकार समाज की आवाज होता है तो क्या जो हम थोडा-बहुत कलम चलाने की कोशिश करते है तो क्या उससे क्रान्ति नहीं आ सकती । हमारा इतिहास गवाह है कि कई बार केवल एक एक दोहे पर ही राजा-महाराजा तक की बुद्धि प्रेरित कर दी जाती थी । हमें नहीं भूलना चाहिए कि कलम में आज भी वो ताकत है । बाकी सबके अपने-अपने विचार हैं । मै आपके विचारों की कद्र करती हूं और आपकी जो कटुता है उसे भी समझती हूं , फ़िर भी हमें पाजिटिव ही सोचना चाहिए । आपके निष्पक्ष विचार जानकर अति प्रस्सन्न्ता हुई । बहुत-बहुत धन्यवाद ।