१.नारी तुम प्रेम हो आस्था हो विश्वास हो ,
टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो
हर जन का तुम्हीं तो आधार हो
नफ़रत की दुनिया में मात्र तुम्हीं प्यार हो
उठो अपने अस्तित्त्व को संभालो
केवल एक दिन ही नहीं ,
हर दिन नारी दिवस बना लो
२. नारी तुम जननी हो
सष्टि में सर्वोत्तम
फ़िर पसरा है क्यों
तुम्हारे ही जीवन में तम
दुनिया को रोशन करती हो
क्यों स्वयं तिल-तिल मरती हो
अपने मन में भी एक
आशा की किरण बसा लो
केवल एक दिन ही नहीं ,
हर दिन नारी दिवस बना लो
३. इतिहास के नाम पर स्वयं को
उपहास क्यों बनाती हो ?
क्यों किसी के अहं के आगे
स्व को भूल जाती हो
तुम लाचार नहीं हो
सजाकर दे दो खुद को
वो उपहार भी नहीं हो
क्यों खो रही हो अपनी गरिमा
केवल पन्नों में खो जाए
तुम्हारी अपार महिमा
उससे पहले ही
अपना नाम कमा लो
केवल एक दिन ही नहीं ,
हर दिन नारी दिवस बना लो
४. याद करो वो सीता स्वयंवर
नारी इच्छा से चुनती थी वर
आज क्यों बन रही हो बेचारी
ऐसी तो कभी न थी
भारत की नारी
दोहरा रही हो तुम
कौन सा इतिहास
क्यों भूल चुकी हो अपनी ही
महानता का अहसास
तुम गुमनाम नहीं हो
जो चुकाया जा सके
वो दाम नहीं हो
खुद को इतना न गिराओ
कि तमाशा ही बन जाओ
भूखी निगाहों के तीर न सहो
बल्कि उन्हीं को निशाना बना लो
केवल एक दिन ही नहीं ,
हर दिन नारी दिवस बना लो
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3 महीने पहले




2 टिप्पणियाँ:
Bahut achhe vichaar liye shashakt abhivyakti....Aabhar!
Happy Women's Day !!
सुन्दर अभिव्यक्ति!!
विश्व की सभी महिलायों को अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
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