. मैं और तन्हाई - भाग १
. मैं और तन्हाई - भाग 2
मुझे देख अकेला तन्हाई
चोरी से क्यों तू चली आई
नहीं तेरा मेरा साथ कभी
मेरे पास तो होंगे अपने सभी
नही चाहिए मुझे तुमसे साथी
जाओ ढूंढो अपने नाती
नहीं मुझे चाहिए साथ तेरा
मेरे पास तो है घर-बार मेरा
मैं इंसां और तू परछाई
क्यों आई यहां तू तन्हाई
पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने किया कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव के
बाल-गीत संग्रहों का विमोचन
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"शेर चंद ने उठाया बल्ला, चीता फिर से गली में दुबका. हाथी ने दस्ताने बांधे,
चिड़िया लगी है गेंद चमकाने. जंगल में यदि क्रिकेट खेला जाए तो कुछ ऐसा ही
होगा...
3 हफ़्ते पहले




2 टिप्पणियाँ:
मैं इंसां और तू परछाई
क्यों आई यहां तू तन्हाई
Yah parchhayi pata nahi kab apni parchhayi me mil jati hai..
बहुत खूब।
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