. मैं और तन्हाई - भाग १
. मैं और तन्हाई - भाग 2
मुझे देख अकेला तन्हाई
चोरी से क्यों तू चली आई
नहीं तेरा मेरा साथ कभी
मेरे पास तो होंगे अपने सभी
नही चाहिए मुझे तुमसे साथी
जाओ ढूंढो अपने नाती
नहीं मुझे चाहिए साथ तेरा
मेरे पास तो है घर-बार मेरा
मैं इंसां और तू परछाई
क्यों आई यहां तू तन्हाई
नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार"
-
(बाल दिवस, 14 नवम्बर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम
में महिला और बाल विकास मंत्री माननीया कृष्णा तीरथ जी ने हमारी बिटिया अक्षिता
(प...
3 महीने पहले




2 टिप्पणियाँ:
मैं इंसां और तू परछाई
क्यों आई यहां तू तन्हाई
Yah parchhayi pata nahi kab apni parchhayi me mil jati hai..
बहुत खूब।
एक टिप्पणी भेजें